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- Book written by Kaushlendra Mishr.
- ISBN: 978-93-87464-18-6
- Started : 01st February, 2026 - Finished :
Pg.9 तो क्या हुआ कि मैं और आप हम-उम्र नहीं, कोशिश रहेगी कि कहानी के इस सफ़र में हम अच्छे दोस्त बन जाएँ।
एक अजनबी हसीना से
Pg.13 नींद को दूर भगाने की हर संभव कोशिश में कभी उठता, थोड़ा टहलता, चाय पीता। सिगरेट के छल्ले बनाता।
Pg.13 मैं कुछ देर के लिए स्टेशन से गुज़रती एक मालगाड़ी में बैठकर अपने बचपन के दिनों में जा पहुँचा-जब सब लोग छुट्टी मनाने नानी के घर जाते थे। तब, जब हाथ में न फ़ोन होता था और न ट्रेन के आने का कोई वक़्त।
Pg.23 पर मेरे लिए तो ख़ुद को नास्तिक कहना भी एक तरह से नास्तिकता नाम के धर्म की अनुयायी करना है| यह भी तो एक तरह की बकैती ही है|
हमरी अटरिया पे, आओ साँवरिया
Pg.27
Pg.27
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