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- Book written by Kaushlendra Mishr.
- ISBN: 978-93-87464-18-6
- Started : 01st February, 2026 - Finished :
Page.11 मास्टर के लगभग हर सवाल का जवाब देने का प्रयास करते थे और फिर लड़कियों की पंक्ति पर एक बार दाँत निपोरते हुए नज़र फेर लेते की कहीं कोई प्रभावित हुए बिना तो नहीं रह गई। उन्हें लगता था एक दिन उनकी इस टिपटिपई से खुश होकर कोई लड़की ख़ुद उनके पास आयेगी और उनसे प्यार का इज़हार करेगी।
Page.11 सुबोध जी पहले-पहल तो प्रोफेसरों के कुछ सवालों के जवाब भी दे देते थे, पर थोड़े दिन बाद ही तत्त्वबोध हो गया कि यहाँ जब कोई कायदे का सुनने वाला ही नहीं, तो काहे इतनी मेहनत की जाए, लड़के तो वैसे ही ससुरे जलते रहते है।
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